प्यासी भाभी को पूरा मजा देकर चोदा- 1

यंग भाभी सेक्स कहानी मेरे दोस्त की कम उम्र की बीवी के साथ सेटिंग करके चुदाई के जुगाड़ की है. एक शादी में मैंने उसकी अतृप्त वासना को भाम्प कर कदम बढ़ाया.

मैं विमल कुमार खन्ना, पंजाबी पुत्तर, नासिक का रहने वाला हूँ. आज मैं आपके सामने मिताली की चुदाई की कहानी लेकर हाजिर हूँ.
मिताली रिश्ते में मेरी भाभी लगती है.

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उसकी सेक्स कहानी पढ़कर आपको विश्वास हो जाएगा कि ये एकदम सच्ची सेक्स कहानी है क्योंकि ये सब मैंने मिताली से बात करके और दोनों की सहमति से ही अन्तर्वासना पर प्रकाशित करवाने के लिए भेजी है.

ये यंग भाभी सेक्स कहानी थोड़ी बड़ी है मगर मुझे आशा है कि आपको बहुत मजा आएगा.

मेरे एक रिश्तेदार का गांव अंजनेरी मेरे शहर नासिक के पास ही था.
मैं छुट्टियों में वहां जाया करता था.

उनके चार बेटे थे. उनके सभी बेटे मुझसे 2-4 साल छोटे बड़े थे. वहां हम सब जम कर मजा करते थे.

मेरी सबसे ज्यादा अमित से जमती थी. अमित मुझसे लगभग चार साल बड़ा था. गांव के स्कूल में ही उसने अपनी शुरूआती पढ़ाई की थी.

अमित जब 25 साल का हुआ, तब वो काम के सिलसिले में थाणे में शिफ्ट हो गया.
जब वो 29 साल का हुआ, तब उसकी शादी आंध्रप्रदेश की एक लड़की से तय हो गई.

हम सभी जब बारात लेकर वहां पहुंचे तो गजब हो गया.
जिस लड़की से शादी पक्की हुई थी वो किसी और लड़के के साथ भाग गई थी.
उस घटना से सब मुश्किल में आ गए थे.

उस लड़की के पिताजी और बाकी रिश्तेदार हम सभी से बार बार माफी मांग रहे थे लेकिन बात तो यहां दोनों परिवारों की इज्जत की थी.

दोनों परिवारों की बदनामी निश्चित लग रही थी.
सभी लोग सकते में थे कि क्या करें क्या नहीं, कुछ समझ नहीं आ रहा था.

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ऐसे में दुल्हन की छोटी बहन मिताली से अमित की शादी का प्रस्ताव रखा गया.
दोनों की उम्र में 10 साल का फर्क था. मिताली उस समय केवल 19 साल की थी और पढ़ रही थी.

वो शादी के लिए तैयार नहीं हो रही थी. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे और क्या ना करे.

सभी रिश्तेदारों ने उसे समझाया कि अब और कोई रास्ता नहीं बचा है. दोनों परिवारों की इज्जत तुम्हारे हाथों में है.

तीन घंटे की मशक्कत के बाद आखिर मिताली शादी के लिए तैयार हो गई.
लेकिन उसने यह शर्त रखी कि वो अभी और पढ़ना चाहती है और पढ़ाई के बाद उसे जॉब करना है.

प्यासी भाभी को पूरा मजा देकर चोदा- 1

उसकी शर्तों को मानने क़े अलावा और कोई चारा भी नहीं था. उसकी शर्तें भी कोई मुश्किल नहीं थीं. अत: दोनों परिवारों ने उसकी शर्तों को मान लिया.

शादी में पहले जैसा खुशी का माहौल तो नहीं था पर शादी अच्छे तरह से हुई.

मिताली दिखने में भी सुंदर थी.
वो अभी 19 साल की कमसिन लौंडिया ही तो थी. उसके उभारों ने अभी पूरा आकार भी नहीं लिया था. वो एकदम कच्ची कली थी.

मिताली का गोरा रंग, स्लिम ट्रिम बदन, उभरे हुए नितम्ब, काली गहरी आंखें, लम्बे लहराते बाल, अदाओं में शोखपन था.
साथ ही वो पढ़ाई लिखाई में अव्वल थी.

वो चलती थी, तो उसके कूल्हे और कमर नागिन की तरह लहराते थे.
कुल मिलाकर एकदम कांटा माल थी वो!

मुझे अमित की किस्मत से जलन हो रही थी.
ऐसी कचनार उसके हाथ जो लग गई थी.
मगर दूसरी ओर मिताली के अरमानों का गला घुट चुका था; उसने अपने से 10 साल बड़े और अनपढ़ पति की कल्पना नहीं की थी.

पहले दिन से ही उसके दिमाग में एक विरोधाभास घर कर चुका था.

अमित और मिताली की शादी हुए अब लगभग 9 साल हो चुके थे.
उसकी पढ़ाई अब खत्म हो गई थी. उसने थाणे में ही एक स्कूल में टीचर का जॉब ज्वाइन कर लिया था.
ये सब उसे पैसों के लिए करने की जरूरत नहीं थी.

अमित अपने बिजनेस में अच्छा कमाता था लेकिन मिताली अपनी स्वतंत्रता बनाए रखना चाहती थी.

उसका एक 7 साल का बच्चा भी था.

शादी के बाद मिताली से मेरी पहली मुलाकात मेरे अपने शहर में ही हुई.
वो परिवार की एक शादी में शामिल होने आई थी और यहीं से हमारे बीच वो सब शुरू हुआ जिसके लिए मैंने ये लेख लिखा है.

शादी एक मंगल कार्यालय से हो रही थी, वो वहीं रुकी हुई थी.

बारात शादी मंडप में जब पहुंची तो हम सब एक साथ बैठे थे. मेरी 3 कजिन बहनें, उनके बच्चे और मिताली भी थी.

मिताली ने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी, वो बला की खूबसूरत लग रही थी.

एकदम छरहरी, बड़े बड़े बटले, शादी के बाद छोटे छोटे सेब, अब छोटे खरबूजों में परिवर्तित हो गए थे.
उसके भरे भरे नितम्ब, वो एकदम रसीला माल लग रही थी.

बात बात में ही नैकलेस की बात चली.
मैंने अनायास ही मिताली के नैकलेस को देखा और देखता ही रह गया क्योंकि वो उसके बूबलाईन पर झूल रहा था.

मैं उसकी दूधिया गहरी घाटियों में जैसे गोते लगाने लगा.

उसने मुझे देखते हुए पकड़ लिया और कहा- शर्म नहीं आती भाभी को ऐसे देखते हुए!
मैंने भी तपाक से कहा- मैं तो छोटा देवर हूँ … मैं कुछ भी देख सकता हूँ.

उसे शायद मेरा जवाब पसंद आया और उसने मुस्कुराते हुए कहा- हट बदमाश कहीं के!
उसके बाद उसने मुझसे बात करनी शुरू की.
हम बहुत देर वहीं बैठ कर बात करते रहे.

मैंने उससे खाना खाने का कहा और हम साथ में खाना खाने चल दिए.
प्लेट लेने वाले स्टाल पर भीड़ थी.
वो मेरे सामने खड़ी हुई और मैं उसके ठीक पीछे खड़ा हो गया.

धक्का लगने के कारण मेरा लंड उसके गांड से चिपक गया.
धीरे धीरे मेरा लंड अपना आकार लेने लगा.

अब मिताली को भी शायद मेरे लंड का स्पर्श महसूस होने लगा था.
उसने पीछे मुड़कर देखा और मुसकुरा दी.

मुझे कुछ उम्मीद होने लगी.

हम लोग आगे बढ़कर खाना लेने लगे.
सब्जियां लेते लेते मैंने उसे दो तीन बार इधर उधर छुआ, उसने कुछ नहीं कहा.

खाना खाकर हम दोनों कुल्फी के स्टाल पर आ गए.
दोनों ने कुल्फी ली और खाने लगे.

वो मुँह में डालकर उसे चूसने लगी.
मैं उसे कुल्फी चूसते देख कर ऐसे सोचने लगा, जैसे वो मेरा ही लंड चूस रही हो.

उसने अचानक मुझसे पूछा- क्या सोच रहे हो?
मैंने कहा- मस्त चूस रही हो, जैसे पता नहीं कितनी प्यासी हो.

वो सिर्फ मुस्कुराकर रह गई.

अभी तक मामला एकदम साफ़ नहीं हुआ था.

बात करते करते मैंने उससे कहा- चलो, छत पर चलते हैं.
वो तैयार हो गई.

हम दोनों छत पर घूमने लगे.
चलते चलते मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
उसने मेरी उंगलियों में अपनी उंगलियां फंसा लीं.

अब मेरी कोहनी उसके मम्मों से छूने लगी थी.
वाह, क्या स्पर्श था … मेरा लंड अब अकड़ने लगा था.

बात बात में उसने बताया कि अमित से उसके सम्बंध अब बराबर नहीं चल रहे हैं. पिछले तीन सालों से वो लोग एक घर में पर लगभग अलग ही रह रहे हैं. इन 3 सालों में उसकी चुदाई भी नहीं हुई है.

मिताली की उम्र अब 28 साल हो गई थी. मैं उससे 6 साल बड़ा था.
मतलब 25 साल की उम्र के बाद उसने चुदवाया नहीं था. यानि उसकी कुल चुदाई केवल 6 साल हुई थी.
शायद यही कारण था कि वो मेरी और इतनी जल्दी आकर्षित हो गई थी.

जवानी की आग, ठंडी होने के लिए तरीके ढूंढ ही लेती है.

अब मैंने अपना हाथ उसके कंधे पर रख दिया. उसने अपना हाथ मेरे कमर में डाल लिया.
मुझे एक मूक स्वीकृति मिल चुकी थी.

हम दोनों अंधेरे कोने की ओर बढ़ गए.
कोने में पहुंच कर मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया. उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया.

थोड़ी देर हम ऐसे ही चिपके खड़े रहकर एक दूसरे की धड़कनों को महसूस करते रहे.
फिर मैंने उसके चेहरे को ऊपर उठाया और उसकी आंखों में झांकने लगा.

उसने शर्मा कर अपना मुँह घुमा लिया.
मैंने फिर उसका चेहरा ऊपर उठाया, अपने अधरों को उसकी ओर बढ़ाया मगर वो हंसती हुए मुझे धक्का देकर भाग गई.

मैं उसके पीछे दौड़ा और उसे पीछे से पकड़ लिया.
वो कसमसाने लगी.
मैंने अपने दोनों हाथ उसके पेट पर रख कर उसे अपने से चिपका लिया.

मैं अपने होंठों से उसके कान और गर्दन को चूमने लगा.
उसकी सांसें गर्म होने लगीं.

मेरा लंड उसकी गांड पर दस्तक देने लगा.
उसने थोड़ा सरककर मेरे लंड को अपनी गांड की दरार पर सैट कर लिया.

मैं अब अपना हाथ उसके चिकने पेट पर घुमाने लगा.
धीरे धीरे मैं अपना हाथ ऊपर उसके मम्मों की ओर बढ़ाने लगा.
जैसे ही मेरा हाथ उसके उरोजों से टकराया, वो फिर मेरे हाथ झटक कर नीचे भाग गई.

मैं भी उसके पीछे पीछे नीचे पहुंच गया.
नीचे शादी की गहमागहमी थी, यहां तो कुछ होना मुश्किल लग रहा था.

वो मुझे देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी.
मैंने उसे थोड़ा गु़स्से से देखा तो उसने अपने कान पकड़ लिए.
मैं हंस दिया और मौके का इंतजार करने लगा.

मौका मिला दूसरे दिन.
जब सभी लोगों का वापस जाना चालू था. ज्यादातर मेहमान जा चुके थे.

मैं जब मंगल कार्यालय पहुंचा तो पता लगा कि मिताली अपने कमरे में पैकिंग कर रही है.

मैं उसके कमरे में पहुंचा और देखा कि आज उसने आसमानी रंग का सूट पहना हुआ था.
उसकी चुन्नी बगल में रखी थी और वो झुककर सामान पैक कर रही थी.
झुके होने के कारण उसके मम्मे आधे से ज्यादा नज़र आ रहे थे.

मेरा दिल डोलने लगा. कमरे में उसके साथ उसका बच्चा भी था.
मैंने उसे देखकर कहा- हुस्न की मलिका को ग़ुलाम का नमस्कार.

उसने मुस्कुराकर मुझे देखा और अपने बच्चे से कहा- बेटा आप बाहर जाकर खेलो … मैं चाचा से सामान पैक करवा लेती हूँ.
बच्चा जैसे ही बाहर गया, उसने दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया और मुझे देखने लगी.

मैंने देर ना करके उसे आगे बढ़कर बांहों में कस लिया. मैंने अपने हाथों को उसके चूतड़, कमर, पीठ पर मसलना शुरू कर दिया, उसका सिर उठाकर उसके अधरों पर अपने अधरों को रख दिया.
उसने भी साथ देना शुरू कर दिया.

हम दोनों की जीभ एक दूसरे के मुँह में घूमने लगीं. दोनों की सांसें भारी होने लगीं.

मैंने अपना दायां हाथ सामने लाकर उसके एक उरोज को पकड़ लिया और हल्के हल्के दबाने लगा.

अब मैं घूमकर उसके पीछे पहुंच गया और अपने दोनों हाथों से उसके दोनों मम्मों को धीरे धीरे मसलने लगा.
वो कसमसाने लगी.

मैंने अपने हाथ उसकी कुर्ती में डाल दिए और उसकी ब्रा के ऊपर से उन्हें मसलने लगा.
उसका बदन गर्म होने लगा.

मैंने अपना एक हाथ नीचे लाकर उसकी सलवार में डाल दिया. उसकी सलवार इलास्टिक वाली थी, जिससे हाथ घुसाने में कोई दिक्कत नहीं हुई.

मेरा लंड उसकी गांड में घुसा जा रहा था.
जैसे ही मेरा हाथ उसकी पैंटी के ऊपर पहुंचा, उसकी मादक सिसकारी निकल गई.

मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चुत की दरार को कुरेदना शुरू कर दिया.
उसकी सिसकारियां तेज हो गईं.

मैंने महसूस किया कि उसकी पैंटी गीली होती जा रही थी.

उसने अपने पैरों को फैला दिया ताकि मेरी उंगलियां अपना काम बेहतर तरीके से कर सकें.

मेरा एक हाथ उसके उरोजों को मसल रहा था और दूसरा हाथ उसकी सलवार में था.

मैंने अपने हाथ को उसकी पैंटी में डाल दिया.
चुत पर बालों का कोई नामोनिशान नहीं था.

मेरी उंगलियां चुत की दरार में घूमने लगीं.
उसके कामरस से मेरी उंगलियां भीगने लगीं.
वो तड़पने लगी.

मैंने उसकी सलवार को नीचे खींच दिया.
सलवार अब उसके पैरों में आ गिरी थी.

मैं सामने आया और अपना मुँह उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चुत पर रख दिया.

उसके मुँह से जोरदार सिसकारी निकल गई.
मैंने धीरे धीरे उसकी पैंटी को नीचे करना शुरू किया, मगर उसने अपनी पैंटी पकड़ ली.

मैं खड़ा हो गया और उसके होंठों को चूमने लगा.
मैंने अपने पैंट की जिप खोलकर अपना लंड बाहर निकाल लिया.

छह इंच लम्बा और तीन इंच मोटा मेरा लंड उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चुत पर दस्तक़ देने लगा.
उसने ऊंचा होकर मेरे लंड को अपनी जांघों के बीच दबा लिया.

मैंने उसके उरोजों को ब्रा के बाहर निकाल लिया और उसके गुलाबी निप्पलों को बारी बारी से चूसने लगा.
मेरा एक हाथ उसके एक मम्मे पर था और दूसरे मम्मे की घुंडी मेरे मुँह में थी.

मैं बारी बारी से उसके दोनों निप्पल चूस रहा था.
मिताली अब धीरे धीरे कामुक आवाजें निकालने लगी थी.

अब वो गर्म होती जा रही थी, साथ ही मेरा लंड पैंट फाड़कर बाहर आने को मचल रहा था.

फिर मैं अपने घुटनों पर बैठ गया और मैंने अपना मुँह मिताली की नाभि पर रख दिया.
उसने फिर से जोर से सिसकारी ली.

मेरे दोनों हाथ अब उसके दोनों उरोजों का मर्दन कर रहे थे.
मिताली तड़फने लगी, उसके मुँह से जोर-जोर से सिसकारियां निकलने लगीं.

मिताली अब चुदासी होने लगी थी.
मैंने उसको बांहों में उठाया और बिछे हुए गद्दे पर फूलों की नजाकत से धीरे से लिटा दिया.

उसने अपनी आंखें बंद कर रखी थीं. उसकी सांसें धौंकनी की तरह जोर-जोर से चल रही थीं, अधर कंपकंपा रहे थे.

मैंने अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिया और उसके अधरों का रसपान करने लगा. मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी.

मिताली मेरी जीभ को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
ये सिलसिला चल निकला. कभी उसकी जीभ मेरे मुँह में होती, तो कभी मेरी जीभ उसके मुँह में.

हम दोनों अपनी खोई हुई इच्छा की पूर्ति करने में लगे थे.
मेरा लंड उसकी चूत पर रगड़ खा रहा था पर बीच में उसकी पैंटी आ रही थी.

उसने अपनी दोनों टांगों को मेरी कमर में फंसा लिया और पैंटी के ऊपर से ही मेरे लंड को निगलने की कोशिश करने लगी.

मिताली ने अपना मुँह अलग किया और बोली- बस अब और मत तड़पाओ, डाल दो अपना मूसल मेरी चूत में … और बजा दो मेरा नगाड़ा.
हम दोनों को ये ख्याल ही ना रहा कि हम अपने बेडरूम में नहीं, वरन एक मंगल कार्यालय में हैं.

मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी को उतारने के लिए बढ़ाया और जैसे बिजली सी कड़क उठी.
हमने देखा कोई दरवाजा भड़भड़ा रहा है.

दोनों की गांड फट गई.

वो संभली और पूछा- कौन है.
बाहर से उसके बच्चे की आवाज आई- मम्मी, पापा बुला रहे हैं.

उसने कहा- आती हूँ, तुम जाओ.
उसके जाते ही हमने अपने अपने कपड़े ठीक किए.
हम दोनों की निगाहों में एक अधूरी प्यास दिख रही थी.

उसने मुझे एक लम्बा किस किया और कहा- थाणे आओ, वहीं बचा हुआ काम पूरा करेंगे.
मुझे उसने अपना मोबाइल नम्बर दिया जो मैंने अपने मोबाइल में सेव कर लिया.

मैंने उससे कहा- इंतजार करना … वो दिन बहुत जल्दी ही आएगा.
हम दोनों बाहर आ गए.

कुली उनका सामान ले गया और गाड़ी में रख दिया.
मैं अमित से गले मिला, मिताली को आंख मारकर नमस्ते किया.

वो लोग गाड़ी में बैठकर निकल गए और मैं अपनी उंगलियों में लगे उसके कामरस को सूंघते और चूसते अपने घर की ओर चल पड़ा.

दोस्तो, मिताली की चुत की आग ने मेरे लौड़े को मानो आग लगा कर छोड़ दिया था.
अब इस यंग भाभी सेक्स कहानी के अगले भाग में मैं आपको मिताली की चुदाई की कहानी का रस पिलाऊंगा.
आप मुझे मेल कर सकते हैं.
vimal.nasik@rediffmail.com

यंग भाभी सेक्स कहानी का अगला भाग:

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